घनश्याम तुम्हारे मंदिर में...


       
घनश्याम तुम्हारे मंदिर में, मैं तुम्हे रिझाने आयी हूँ।
वाणी में तनिक मिठास नहीं, पर विनय सुनाने आयी हूँ।
चरणामृत तुम्हारा लेने को, है पास मेरे कोई पात्र नहीं।

आँखों के दोनों प्यालों में, मैं प्रीती माँगने आयी हूँ।
तुम स्वामी हो मैं दासिन हूँ, सम्बन्ध बताने आयी हूँ।
जय श्री कृष्णा...
       

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