"श्रीराधेकृष्ण युगल सरकार"
(पृष्ठ निर्माण प्रक्रिया में है...)
श्रीराधेकृष्ण युगल सरकार दो देहों में एक आत्मा हैं। पुरुष और प्रकृति एक दुसरे के बिना अस्तित्वहीन हैं। कृष्ण मूल तत्व पुरुष (पदार्थ) और राधा मूल प्रकृति हैं। कृष्ण ही शिव हैं और राधा मूल प्रकृति उनकी शक्ति। पुरुष और प्रकृति, शिव और शक्ति जब एकाकार होते हैं तब सृष्टि उत्पन्न होती है! यही सौन्दर्य है! यही कृष्ण तत्व है! यही राधा तत्व है!
विश्व जब महार्णव में निमग्न था तब केवल कृष्ण परम ज्योति स्वरुप में उपस्थित थे। उन्होंने संकल्प किया और अपने वामांग से मूल प्रकृति शक्ति को उत्पन्न किया। और सुन्दर सुन्दर लीलाएं करने के लिए गोलोक धाम में रासमण्डल का निर्माण किया जहाँ श्रीराधेकृष्ण युगल सरकार लीलाएं करने लगे।
लीला करते-करते एक समय श्री राधिकाजू के हृदय में अपनी लीलाओं के विषय में जानने की इच्छा प्रकट हुई। उन्होंने परात्पर भगवान् श्रीकृष्ण से कहा कि हम लीलाएं तो करते हैं किन्तु हमारीं लीलाएं होतीं कैसीं हैं ये हम नहीं जान पाते। तब श्रीकृष्ण की प्रेरणा से शुक (तोता) प्रकट हुआ।
अब जब भी युगल सरकार लीलाएं करते तो शुकदेव जी लीलाएं देखते और फिर राधिका जू को उन्हीं लीलाओं का वर्णन करके सुनाते।
एक बार श्रीराधिका जू को शुकदेव जी का लीला वर्णन इतना भा गया कि उन्होंने उसकी चोंच पर चुम्बन कर लिया। श्री राधिका जू के अधरों की लालिमा उस शुक की चोंच में आ समाई। तबसे ही शुक की चोंच लाली लिए हुए है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें