अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान
जनम-जनम रति श्याम पद, यह वरदान न आन
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे श्याम
सिमरूँ निश दिन हरि नाम, यही वर दो मेरे श्याम
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे श्याम
मेरे श्याम, मेरे श्याम, मेरे श्याम, मेरे श्याम
मन मोहन छवि नैन निहारे, जिह्वा मधुर नाम उच्चारे,
कनक भवन होवै मन मेरा, जिसमें हो श्री श्याम बसेरा यही वर दो मेरे श्याम
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे श्याम
सौंपूं तुझको निज तन मन धन, अरपन कर दूं सारा जीवन,
हर लो माया का आकर्षण, प्रेम भगति दो दान, यही वर दो मेरे श्याम
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे श्याम
गुरु आज्ञा ना कभी भुलाऊँ, परम पुनीत श्याम गुन गाऊँ,
सिमरन ध्यान सदा कर पाऊँ, दृढ़ निश्चय दो श्याम यही वर दो मेरे श्याम,
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे श्याम
संचित प्रारब्धों की चादर, धोऊं सतसंगों में आकर,
तेरे शब्द धुनों में गाकर, पाऊं मैं विश्राम, यही वर दो मेरे श्याम
रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे श्याम

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