ए री मैं तो प्रेम दीवानी...
ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दरद न जाने कोय
न मैं जानूँ आरती-वंदन न पूजा की रीत
है अनजानी दरस दीवानी मेरी पागल प्रीत
लिए री मैंने दो नैनों के दीपक लिए संजोय
ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दरद न जाने कोय
आशा के फूलों की माला साँसों के संगीत
इन पर फूली चली रिझाने अपने मन का मीत
लिए री मैंने नैन डोर में सपने लिए संजोय
ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दरद न जाने कोय
घायल की गति घायल जाणै जो कोई घायल होय
जौहरि की गति जौहरी जाणै की जिन जौहर होय
सूली ऊपर सेज हमारी सोवण किस बिध होय
गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय
दरद की मारी बन-बन डोलूं बैद मिल्या नहिं कोय
मीरा की प्रभु पीर मिटेगी जद बैद सांवरिया होय
ए री मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दरद न जाने कोय
श्रीकृष्णचरणानुरागी: आदित्य श्रीराधेकृष्ण सोऽहं

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