एक तरफ तो गोपियाँ मैया से कन्हैया की शिकायत करें और घर में कन्हैया को याद करते करते दधि मंथन करें। दधि मंथन करते समय प्रत्येक गोपी की यही कामना है कि प्रभु आज आप माखन चोरी करने मेरे घर पधारिये। नित्य गोपियाँ दधि मंथन करतीं ही इसी कामना से हैं कि गोविन्द उनके घर पधारें। दधि मंथन करते समय गोपियाँ गातीं हैं...
सूनी है गोकुल नगरिया आजा आजा साँवरिया
सूनी है गोकुल नगरिया आजा आजा साँवरिया
वृन्दावन के तुम हो राजा भक्तों को अब दरस दिखा जा
दरस दिखा जा दरस दिखा जा आके बजा जा मुरलिया
आजा आजा साँवरिया
ऐसी प्रीत लगी मनमोहन तेरे बिन मैं हो गई जोगन
ढूंढूं नगर और नगरिया आजा आजा साँवरिया
ब्रज नगरी कीं सब ब्रज नारी देखें साँवरिया बाट तिहारी
बाट तिहारी कान्हा बाट तिहारी देखें साँवरिया बाट तिहारी
तुझको ढूंढें गुजरिया आजा आजा साँवरिया
बरसाने में रसिक दुलारे ग्वाल-बाल के प्राण-प्यारे
सखियाँ देखें डगरिया आजा आजा साँवरिया
ब्रजबामाओं के मनोरथों की सिद्धि के लिए ही माधव ने ये मधुर मंगल मई लीला की।

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