कन्हैया की जब बंसी बजती है तब गिरिराज गोवर्धन के कठोर पाषण भी द्रवीभूत हो जाते हैं, यमुना की कल-कल करती धारा भी स्थिर हो जाती है!
मोहे आन मिलो घनश्याम बहुत दिन बीत गए...
अब हो गयी जीवन की शाम , बहुत दिन बीत गए
राधा के हो तुम बड़े प्यारे, मेरे भी बन जाओ सहारे
भक्तों के भगवान्, बहुत दिन बीत गए...
मुरली वाले मुरली बजाना, सोये हुए फिर भाग जगाओ
मीरा के घनश्याम, बहुत बीत गए...
मन मंदिर में रास रचा जा, रूप साँवरा दरस दिखा जा
जीवन की हो गई शाम, बहुत दिन बीत गए...
तेरी सुरतिया पे वारि जाऊं, तुमको अपने दिल में छिपाऊं
तुम्हे देखे ना दुनिया तमाम, बहुत दिन बीत गए
मोहे आन मिलो घनश्याम, बहुत दिन बीत गए
अब हो गयी जीवन की शाम , बहुत दिन बीत गए...
आदित्य श्रीराधेकृष्ण सोऽहं

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें