किशोरी कुछ ऐसा इन्तजाम हो जाए...


 
ये तो बताओ बरसाने वाली 
मैं कैसे तुम्हारी लगन छोड़ दूँगा 
तेरी दया पर ये जीवन है मेरा 
मैं कैसे तुम्हारी शरण छोड़ दूँगा 




जब गिरते हुए मैंने तेरा नाम लिया है 
ओ गिरने न दिया तूने मुझे थाम लिया है!


न पूछो किये मैंने अपराध क्या-क्या 
कहीं ये ज़मीं आसमा हिल न जाए 
जब तक श्रीराधारानी क्षमा न करोगी 
मैं कैसे तुम्हारे चरण छोड़ दूँगा


राधे! राधे! 
बहुत ठोकरें खा चूका जिंदगी में 
तमन्ना तुम्हारे दीदार की है 
जब तक श्रीराधारानी दर्शन न दोगी 
मैं कैसे तुम्हारा भजन छोड़ दूँगा


तारो न तारो मर्जी तुम्हारी 
लेकिन मेरी आखिरी बात सुन लो 
मुझको श्रीराधारानी जो दर से हटाया 
तुम्हारे ही दर मैं दम तोड़ दूँगा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें